गांधी की जिंदगी हमेशा ही अधिक कठिन संघर्ष चुनने की जिंदगी रही है।:

महात्मा गांधी पूरी तरह से मौलिक क्रांतिकारी थे । उस कोमल भारतीय महात्मा ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने की एक ऐसी कठोर शैली प्रस्तुत की जिसकी काट ब्रिटिश सरकार अंततः नहीं खोज पायी तथा जिसकी शक्ति और मौलिकता की संपूर्ण विश्व में कोई मिसाल नहीं थी। गांधी की जिंदगी हमेशा ही अधिक कठिन संघर्ष चुनने की जिंदगी रही है। जो संघर्ष अधिक मुश्किल है, जो संघर्ष लोकप्रिय नहीं है। अहिंसा अपने आप में लोकप्रिय सिद्धांत नहीं है। आप नौजवानों से बात करेंगे तो वे हिंसा को चुनेंगे अहिंसा के खिलाफ जायेंगे। तो गांधी ने बहुत कठिन और अलोकप्रिय सिद्धांत को प्रस्तुत किया तथा उसे शांतिप्रिय लोगों की दिनचर्या बना दिया।
जब हिंसा की प्रतिष्ठा अपने पूरे चरम पर थी गांधी ने अहिंसा का एक ऐसा हथियार सामने रखा जिसमें मानव जाति के लिए एक नई आशा का सूत्रपात हुआ। मशीनगनों और तोपों का सामना हथियारों से नहीं आत्मबल से करो, बन्दूखों से नहीं प्रार्थनाओं से लड़ो, बमबारी और चीख पुकार से नहीं आत्मबल, खामोशी व धैर्य से लड़ो। उनके इस ऊपरी तौर पर सरल दिखने वाले इस संदेश में एक असीमित शक्ति छिपी हुई थी जिसने भारत जैसे भीड़ भड़क्के वाले देश में बिजली दौड़ा दी।गांधी का संदेश इतना सरल और सहज था कि कमजोर से कमजोर आदमी भी यदि चाहे तो मानवता के शिखर को छू सकता था।
यूरोप में जब तानाशाह गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहे थे और धू धू कर जलती इमारतें भयावह शोर के साथ धराशाई हो रहीं थीं तब आवादी के बोझ तले इस अजीबोगरीब देश में गांधी एक एक व्यक्ति तक अपना संदेश इतनी शांति के साथ फैला रहे थे कि उन्हें अपना स्वर ऊंचा करने तक की जरूरत तक नहीं पड़ी। देश में अपने अनुयायियों को एकत्रित करने के लिए उन्हें कोई सब्जबाग दिखाने की जगह कड़ी चेतावनी देते थे ” जो मेरे साथ हैं उन्हें नंगे फर्श पर सोना होगा ,खादी के खुरदरे कपड़े पहनना होंगे, सादा और स्वाद हीन भोजन करना होगा और अपना पाखाना भी स्वयं साफ करना होगा।”
गांधी का संदेश बच्चे, बड़े , बूढ़े और महिलाओं तक सहज रूप में पहुँच जाता था। गांधी अपने पत्र खुद व लांग हेंड में लिखते । कांग्रेस पार्टी का अधिवेशन हो, प्रार्थना सभा हो या सार्वजनिक अवसर हो जो भी बोलते वह देश की आवाज बन जाता था ,आग की तरह फैल जाता।
उन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य को झकझोर कर रख दिया। गांधी ने भूख का एक हथियार के रूप में उपयोग किया। उस भूख को जिसने आम भारतीय आदमी की पेट और पीठ एक कर दी थी ,आम आदमी की हड्डियां बाहर निकाल दी थीं।वे जहां भी गए जनता उनके पीछे पीछे गयी।जब वे भोजन त्याग देते थे और उपवास पर बैठते तो इंग्लैंड का सिंहासन डोल उठता।
गांधीजी का हमेशा यही सपना रहा कि वे एक ऐसे आधुनिक भारत का निर्माण करेंगे जो दुनिया के सामने उनके सामाजिक आदर्शों की जीती जागती मिशाल हो। वे भारत को एक ऐसा देश बनाना चाहते थे जिसके सभी देशों से मित्रवत सम्बन्ध रहें। मानवता को डूबने से बचाने के लिए यह एक समझदार, दूरदर्शी व परिपक्व विचारों वाले व्यक्ति का कल्याणकारी पथ था।

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