मूर्ख व्यक्ति का दिमाग भी कम उत्पादक नहीं होता। वह भी हर पल नए -नए विचार फेंकता है ।

आन्दोलन गांधीवादी तरीके से होना चाहिए” ये उपदेश भलेमानस और सरकार समर्थक दोनों देते हैं। शाहीनबाग आन्दोलन तो गांधीवादी तरीके से ही हुआ था लेकिन इसकी प्रतिक्रिया में पूरे दिल्ली को आग लगाने वाले और उनके पीछे खड़ी ताक़तें कौन थीं ! शाहीनबाग आन्दोलन से जुड़े हुए तमाम लोग जेलों में क्यों डाले गए और आजतक उनकी पहचान कर बदले की कार्यवाही क्यों की जाती है !
बुलडोज़र कौन से गांधीवाद का प्रतीक है जो कानून, संविधान, कोर्ट और मुसलमानों के सम्मान को रौंद रहा है और वो कौन से गांधी वादी हैं जो बुलडोज़र न्याय पर लहालोट हैं !

आपको युवाओं का ट्रेन फूँकना नज़र आ रहा है लेकिन इन युवाओं को अग्निकुंड किसने बनाया ? ये महज़ अग्निपथ पर विरोध नहीं है बल्कि युवाओं का फ्रस्ट्रेशन है जिसके पीछे एक इज्ज़तदार ज़िन्दगी की चाहत है। देश की सियासत ने युवा शक्ति को मुसलमानों की ओर मोड़ दिया और बिना कुछ किये सत्ता हासिल करते रहे, पर कब तक, कब तक मुसलमानों की पीड़ा में ये आनंदित होते रहेंगे ! दो वक्त की रोटी और सुरक्षा का एहसास उन्हें भी तो चाहिए ! 24 में भी वोट धर्म के ही आधार पर पड़ेगा, सत्ता भी बीजेपी को मिलेगी लेकिन युवाओं का ये गुस्सा बता रहा है कि सिर्फ मुसलमानों की तकलीफ के दृश्य दिखाकर इन्हें लंबे समय तक संतुष्ट नहीं किया जा सकता !

बेरोजगारों के इस आक्रोश की वजह बहुत स्वाभाविक है क्योंकि ज्यादातर को यकीन था कि मोदी देश और लोंगों का भला करेंगे ही क्योंकि उनको लगा कि तथाकथित हिन्दुववादी प्रधानमंत्री मोदी मुस्लिम को बर्बाद कर सारी समस्याओं का समाधान कर देंगे ।
उन बेरोजगार मोदी भक्तों की सहनशीलता अब खत्म होनी ही थी आखिर अच्छे दिनों की आस में मुस्लिम को बर्बाद कर सारी समस्याओ का समाधान की कल्पना की मटकी फूट गई और उनमें से एक निराशा की गंगा बहने लगी कि अब्दुल अब भी महंगे दामों पर पंचर जोड़कर बिरियानी बेचकर फल सब्जी की महंगाई से ठेले से रोज ज्यादा कमाकर खुश होता गया संपन्न हो गया पर बेचारे हिन्दुव के रक्षक देश के लिए प्राण निछावर करने वाले हिन्दुव के रक्षकों को क्या मिला चार साल की नौकरी का आधा टूटा लॉलीपॉप । अब विपक्ष की जिम्मेदारी है कि बीजेपी की गलत नीतियों के बजाय पूरे देश वासियों को संविधान और नागरिक अधिकारों के तहत उनके लिए उनकी सरकारें प्रदेश और देश के स्तर पर क्या बेहतर करेंगी यह बात पूरी ईमानदारी से बताये । बीजेपी का गलत बहुत लोगों को दिख रहा है पर विपक्ष भी अपनी बात को बिना बीजेपी का प्रचार (नकारात्मक ही सही)किये लोंगों तक नही पहूंचा पा रहे हैं ।

इस समय से लेकर दो साल जनता को अकेले नहीें महसूस कराना है

मजबूर नहीं मजबूत की तरह बर्ताव करना है क्योंकि 35 साल की सर्विस के बाद भी छह महीने और बढाने के लिए कोर्ट तक जाने वाले पूर्व जनरल वी के सिंह (वर्तमान मंत्री, भारत सरकार) भी अग्निपथ योजना को सही बता रहा है  मूर्ख व्यक्ति का दिमाग भी कम उत्पादक नहीं होता। वह भी हर पल नए -नए विचार फेंकता रहता है । हैरत की बात यह है कि अनेक प्रज्ञावान व्यक्ति इन्हीं विचारों से लड़ते रहते हैं और मूर्ख को उसके मूर्ख होने का अहसास नहीं होने देते!

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