जागो सरकार जागो.! शहर की दुर्दशा का जिम्मेदार आखिर कौन..?

रेवाड़ी,।

जनता किसी भी पार्टी की सरकार इसलिए चुनती है कि उन्हें न केवल मौजूदा समस्याओं से निजात मिलेगी, बल्कि पहले से बेहतर सुविधाएं भी मिलने लगेंगी, लेकिन फिर भी अगर आवश्यक सुविधाओं के लिए लोगों को तरसना पड़े तो इसे आप क्या कहेंगे। मगर यहां ऐसा ही कुछ चल रहा है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं पीतल नगरी के नाम से मशहूर रेवाड़ी शहर की, जहां आज भी लोग न केवल दुर्दशा का शिकार है, बल्कि नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो चले हैं। बात चाहे बाजारों में फैले अतिक्रमण की हो, वाहनों की पार्किंग की हो, चौराहों पर लगी रेड लाइटों की हो, अवैध कब्जों की हो, प्रॉपर्टी टैक्स की हो, सफाई व्यवस्था की हो या फिर कोई और हो.. शहर के हालात किसी से छिपे नहीं हैं, जिन्हें लेकर अक्सर लोगों को नगर परिषद को कोसते देखा जा सकता है।
शहर की लाइफ लाइन कहलाने वाले सर्कुलर रोड पर बने फुटपाथ पर अवैध कब्जे इस कदर हो चले हैं कि लोगों ने फुटपाथ को अपनी धरोहर ही समझ लिया है तो वही पार्किंग के नाम पर शहर में ऐसी कोई जगह नहीं, जहां लोग अपने वाहन खड़ा कर सकें। ऐसे में पूरा सर्कुलर रोड ही अवैध पार्किंग स्थल में तब्दील हो गया है और सर्कुलर रोड पर जगह जगह खड़े वाहन शहर की सुंदरता में ग्रहण का काम कर रहे हैं।वहीं शहर के प्रमुख बाजारों में फैले कोढ़ रूपी अतिक्रमण के कारण दुपहिया वाहन तो दूर पैदल लोगों का भी इन बाजारों से गुजरना दुश्वार हो गया है।
जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए खर्च कर चौराहों पर लगी रेड लाइटें सफेद हाथी बनी खड़ी दिखाई दे रही है। वहीं सर्कुलर रोड पर सड़क के बीचो-बीच फैला बिल्डिंग मेटेरियल भी वाहनों के आवागमन में किसी बड़ी बाधा से कम नहीं है। ऐसे में वाहनों के सुचारू संचालन में ट्रैफिक पुलिस भी अपने आपको असहाय महसूस करती है। लोगों की सुविधा के लिए सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें यहां तक कि लाखों खर्च कर लगाई गई महाराजा लाइटें भी अधिकांश जगहों पर शो पीस ही साबित हो रही है। वहीं शहर की गलियों से लेकर सड़कों तक गंदगी के अंबार भी कम नहीं है। उपायुक्त महोदय के निर्देश के बावजूद अभी तक शहर में नालों की सफाई भी ठीक से नहीं हो पाई है।
वहीं प्रमुख बाजारों में सड़क के बीचो बीच खड़ी रेहड़ियों के लिए नगर परिषद कोई जगह तक चिन्हित नहीं कर पाई है। वहीं इन रेहड़ियों पर अगर कार्रवाई की करें तो इस स्थिति वही ढाक के तीन पात वाली दिखाई पड़ रही है, जिसका खामियाजा लोगों को जाम में फंसकर भुगतना पड़ता है। शहर की सड़कों से लेकर चौराहों तक अनेक स्थानों पर बिना किसी टैंडर के लगे होल्डिंग भी शहर की दुर्दशा को बढ़ाने में पीछे नहीं हैं। इस पर भी नगर परिषद का कोई नियंत्रण नहीं है।
शहर में जब भाजपा की सरकार बनी थी तो लोगों को नवनियुक्त चेयरपर्सन से काफी उम्मीदें थी, लेकिन जैसे-जैसे वक्त निकलता गया, लोगों की उम्मीदों पर भी पानी फिरता चला गया शहर की सरकार बने आज करीब डेढ़ साल से ज्यादा वक्त बीत गया है, लेकिन शहर के हालातों में कोई खास सुधार नहीं हो सका और यह हाल तो तब है जब शहर से लेकर प्रदेश और देश में एक ही पार्टी की सरकार है।मगर इन समस्याओं को लेकर जब भी कभी नगर परिषद चेयरपर्सन से बात की जाती है तो एक ही रट रटाया जवाब मिलता है कि जल्द ही व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा, लेकिन वह सुधार कब होगा और कौन करेगा, इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है। मगर अब शहरवासी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वाक्य को याद करते हुए केवल यही सोचने लगे हैं कि आखिर रेवाड़ी के भी अच्छे दिन जरूर आएंगे।
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