President Vladimir Putin: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज भारत दौरे पर पहुंचे। पीएम मोदी से मुलाकात में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन, रक्षा सौदों, ऊर्जा सहयोग, व्यापार बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक मुद्दों पर अहम बातचीत होगी।

भारत: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन, रक्षा सहयोग, Su-57 फाइटर जेट चर्चा, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार समझौते और वैश्विक मुद्दों पर रणनीतिक बातचीत की उम्मीद है।
📰 पुतिन का भारत दौरा: कब और क्यों
पुतिन 4–5 दिसंबर 2025 को भारत आ रहे हैं। यह दौरा उनके लिए चार साल बाद पहला औपचारिक भारत दौरा है।
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित करना है।
इस दौरान वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे; साथ ही भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित राजकीय भोज आदि कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
Threat to Indigo Flight: IndiGo फ्लाइट में बम धमकी, मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग; सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटीं।
🗓 दौरे का शेड्यूल — मुख्य माइलस्टोन (4–5 दिसंबर)
4 दिसंबर की शाम को पुतिन दिल्ली पहुँचेंगे। इस दिन पीएम मोदी की ओर से 7, लोक कल्याण मार्ग पर एक निजी रात्रिभोज (Private Dinner) आयोजित किया गया है।
5 दिसंबर को सुबह — पुतिन का राष्ट्रपति भवन में स्वागत, गार्ड ऑफ ऑनर। उसके बाद राजघाट में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि।
करीब 11 बजे हैदराबाद हाउस में मोदी-पुतिन के बीच 23वी शिखर बैठक होगी, जिसमें द्विपक्षीय समझौतों और कई अहम एजेंडों पर चर्चा।
दोपहर में दोनों नेता भारत-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे, बाद में राष्ट्रपति भवन में राजकीय भोज आयोजित होगा।
करीब 30 घंटे भारत में बिताने के बाद पुतिन 5 दिसंबर की रात भारत से रवाना होंगे।
✅ शिखर सम्मेलन के प्रमुख 10 एजेंडाः किस बात पर होगी चर्चा
देर से सार्वजनिक रिपोर्टों और मीडिया अनुमान के आधार पर —
रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग —
विशेष रूप से S-400 वायु रक्षा प्रणाली, इसके अतिरिक्त वायु सुरक्षा व मिसाइल रक्षा प्रणालियों, और संभवतः Su-57 फाइटर जेट के सौदे।
देरी से हो रही पुरानी रक्षा परियोजनाओं (जैसे सु-30 अपग्रेड, अन्य ज़रूरी उपकरण) की समीक्षा।
ऊर्जा सहयोग — रूस से कच्चे तेल, गैस व ऊर्जा आपूर्ति, वार्ता कि कैसे भारत-रूस ऊर्जा व्यापार को सुरक्षित रखा जाए पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच।
व्यापार और आर्थिक भागीदारी — तेल के अलावा, भारत से रूस को अधिक निर्यात (जैसे मशीनरी, फ़ार्मा, कृषि उत्पाद), द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को सुधारने पर चर्चा।
औद्योगिक और तकनीकी साझेदारी — ऊर्जा, उद्योग, उच्च-प्रौद्योगिकी, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, और अन्य उन्नत परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने की योजना।
नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग — भारत-रूस के बीच सिविल न्यूक्लियर सहयोग, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) या अन्य न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स पर बातचीत।
वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा, भू-राजनीति — रूस-यूक्रेन युद्ध, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, युद्ध व शांति पहल, और भारत की सहमति व भूमिका।
वैश्विक एवं क्षेत्रीय आर्थिक चुनौतियाँ — व्यापार, वित्त, मुद्रा, आपूर्ति-शृंखलाओं की सुरक्षा, विशेष रूप से पश्चिमी दबाव में सहयोग कैसे बनाए रखें।
मल्टी-डोमेन रणनीतिक साझेदारी (Special & Privileged Strategic Partnership) को फिर से मजबूत करना — 1990-2000 दशक से चली आ रही इस साझेदारी को नए स्वरूप में पुनर्निर्मित करना।
व्यापार व उद्योग में निवेश और रूसी निवेश को भारत में आकर्षित करना — भारत में रूसी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों की भागीदारी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी आदि में निवेश पर चर्चा।
मीडिया, विज्ञान-संस्कृति, शिक्षा, मानव संसाधन और तकनीकी सहयोग — व्यापार व रक्षा से हटकर, सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्रों में रूस-भारत सहयोग को आगे बढ़ाना।
🔎 पुतिन-पीएम मोदी की मुलाकात: क्या उम्मीदें?
यह दौरा न सिर्फ डील्स या समझौतों के लिए है, बल्कि दोनों देशों के बीच “रणनीतिक भरोसे” को फिर से परिभाषित करने का अवसर है।
पुतिन ने पहले ही बताया है कि रूस भारत के साथ अपने आर्थिक व रणनीतिक रिश्तों को “गुणवत्तापूर्ण नया स्तर” देना चाहता है — जिसमें तकनीक और आधुनिक क्षेत्र भी शामिल होंगे।
रक्षा, ऊर्जा व व्यापार — तीनों में संतुलन बनाए रखते हुए, दोनों देश वैश्विक तनाव के बीच अपनी रणनीतिक आज़ादी बनाए रखने की कोशिश करेंगे।





