
Stays on New UGC Rules: UGC नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, CJI बोले—क्या समाज को पीछे जा रहे?
Stays on New UGC Rules: UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक बरकरार रखी, सुनवाई के दौरान CJI ने तीखा सवाल किया कि क्या ऐसे फैसले समाज को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाने वाले हैं।
🧑⚖️ 1. सुप्रीम कोर्ट ने नए UGC नियमों पर रोक लगा दी
सर्वोच्च अदालत ने UGC के ‘Equity Regulations 2026’ को लागू करने पर रोक लगा दी है और कहा कि फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को 19 मार्च 2026 तक जवाब देने का निर्देश दिया है।
📌 2. CJI का सवाल: क्या हम समाज को पीछे ले जा रहे हैं?
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान यह तीखा सवाल पूछा कि क्या हमने 75 साल में जो जाति-विहीन और समावेशी समाज बनाने की कोशिश की, उससे हम पीछे की तरफ जा रहे हैं?
अदालत ने कहा कि कुछ प्रावधान अस्पष्ट (“vague”) हैं और दुरुपयोग की संभावना है।
सुनवाई के दौरान यह भी चिंता जताई गई कि नए नियम समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं।
Fourth Largest Economy: जापान को पीछे छोड़ भारत बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, महाशक्ति की ओर
🧾 3. नए नियम क्यों विवादित हैं?
UGC के ये नए नियम “Equal Opportunity / Equity Regulations” के नाम पर लाए गए थे, जिनका उद्देश्य था कि भेदभाव और अनुचित व्यवहार पर रोक लगे और सभी छात्रों को समान अवसर मिले।
लेकिन:
कई लोगों ने कहा कि नियम की भाषा अस्पष्ट है।
विरोधी बोले कि इससे जाति-आधारित अलग-अलग व्यवस्थाएँ बन सकती हैं (जैसे अलग हॉस्टल आदि)।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर चिंता जताई कि इससे सामाजिक विभाजन पैदा हो सकता है।
📢 4. विरोध और राजनीति भी तेज
देश भर के छात्रों, संगठनों और राजनीतिक हस्तियों ने इन नियमों पर विरोध या समर्थन व्यक्त किया है — कुछ ने कहा कि ये नियम शिक्षा की स्वतंत्रता पर असर डालेंगे, तो कुछ ने शिक्षा में समानता बढ़ाने का समर्थन किया।
🧠 5. अब क्या होगा?
✔️ नए नियम फिलहाल लागू नहीं होंगे।
✔️ अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी।
✔️ तब कोर्ट केंद्र सरकार और UGC से इस पूरे विवाद पर विस्तृत जवाब मांगेगी।
🧩 सार में
👉 सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए आदेशों को रोक दिया।
👉 CJI ने सोचा-समझा सवाल पूछा कि क्या ये नियम समाज को पीछे की ओर ले जा रहे हैं, बजाय आगे बढ़ाने के।
👉 अदालत ने कहा कि नियमों में सुधार की जरूरत है और पहले के 2012 के नियम अब भी लागू रहेंगे जब तक नया निर्णय न हो।



