Holashtak Shubh Muhurat: होलाष्टक ही नहीं, हिंदू धर्म में इन 5 मौकों पर भी नहीं होते शुभ-मांगलिक कार्य
Holashtak Shubh Muhurat: होलाष्टक ही नहीं, हिंदू धर्म में इन 5 मौकों पर भी नहीं होते शुभ-मांगलिक कार्य
हिंदू धर्म में होलाष्टक को अशुभ काल माना जाता है। यह होली से पहले के 8 दिन होते हैं, जब विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया व्यवसाय शुरू करना या अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस अवधि में ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं रहती, इसलिए शुभ कार्यों से बचना चाहिए। लेकिन सिर्फ होलाष्टक ही नहीं — हिंदू परंपरा में कुछ और समय भी ऐसे माने गए हैं जब शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
🔴 ये हैं वो 5 मौके जब शुभ काम टाले जाते हैं
1️⃣ पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष)
पूर्वजों को समर्पित यह 15 दिन का काल होता है। इस दौरान पूजा-पाठ और श्राद्ध किए जाते हैं, लेकिन शादी या नए काम शुरू नहीं किए जाते।
2️⃣ मलमास (अधिक मास)
जब चंद्र और सौर कैलेंडर के संतुलन के लिए अतिरिक्त महीना आता है, उसे मलमास कहते हैं। इस पूरे महीने में विवाह और शुभ कार्य टाल दिए जाते हैं।
3️⃣ ग्रहण काल (सूर्य या चंद्र ग्रहण)
ग्रहण को अशुभ माना जाता है। इस समय पूजा, भोजन और मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।
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4️⃣ भद्रा काल
पंचांग में भद्रा का समय कुछ कार्यों के लिए निषिद्ध माना जाता है, खासकर विवाह और यात्रा जैसे शुभ कामों के लिए।
5️⃣ गुरु या शुक्र अस्त काल
जब बृहस्पति (गुरु) या शुक्र ग्रह अस्त होते हैं, तब शादी-विवाह और बड़े शुभ कार्य नहीं किए जाते क्योंकि ये ग्रह मांगलिक कार्यों के कारक माने जाते हैं।
🟡 धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
इन सभी अवधियों में शुभ कार्यों से दूरी बनाकर पूजा-पाठ, तप और आत्मचिंतन करने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि सही समय पर किए गए कार्य अधिक फलदायी होते हैं।
