War Impact on India
War Impact on India
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है, जहां से दुनिया के करीब एक-तिहाई समुद्री कच्चे तेल की आपूर्ति गुजरती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि सप्लाई रूट बाधित होता है तो भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अनुमान है कि मौजूदा खपत के हिसाब से भारत के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार शेष है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जो इसी जलमार्ग से होकर आता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है या शिपिंग बीमा महंगा होता है, तो तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई पर दबाव बनने की आशंका है।
सरकार की ओर से रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) और वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों पर नजर रखी जा रही है। भारत ने पहले भी आपात स्थिति के लिए भंडारण क्षमता विकसित की है, ताकि वैश्विक संकट के समय कुछ हफ्तों तक आपूर्ति बनाए रखी जा सके।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही अस्थिरता देखी जा रही है। निवेशकों की चिंता यह है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल भारत स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और कूटनीतिक स्तर पर शांति की अपील कर रहा है। आने वाले दिनों में होर्मुज की स्थिति तय करेगी कि तेल बाजार में स्थिरता लौटेगी या संकट और गहराएगा।