AIIMS Delhi Euthanasia Case News

AIIMS Delhi Euthanasia Case News

AIIMS Delhi Euthanasia Case News : देश की राजधानी Delhi में स्थित देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल All India Institute of Medical Sciences में इच्छामृत्यु (Euthanasia) से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक मरीज के मामले में डॉक्टरों की टीम और परिजनों के बीच बातचीत के बाद इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को लेकर विचार किया जा रहा है।

यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर देश में इच्छामृत्यु के कानून, नैतिकता और मरीज के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे मानवीय निर्णय मान रहे हैं, तो कुछ लोग इसके खिलाफ भी अपनी राय रख रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

AIIMS Delhi Euthanasia Case News : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एम्स में भर्ती एक मरीज काफी लंबे समय से गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत लगातार गंभीर बनी हुई है और इलाज के बावजूद स्वास्थ्य में सुधार की संभावना बहुत कम है।

बताया जा रहा है कि मरीज लंबे समय से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है और सामान्य जीवन में लौटने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है। ऐसे में मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों से इच्छामृत्यु की संभावना को लेकर चर्चा की है।

इस मामले में अस्पताल की मेडिकल टीम, एथिक्स कमेटी और कानूनी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इच्छामृत्यु क्या होती है

इच्छामृत्यु को अंग्रेजी में Euthanasia कहा जाता है। इसका मतलब है किसी गंभीर और असाध्य बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को उसकी इच्छा या परिस्थितियों के आधार पर जीवन समाप्त करने की अनुमति देना, ताकि उसे लंबे समय तक दर्द और पीड़ा से मुक्ति मिल सके।

इच्छामृत्यु मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:

1. सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia)
इसमें डॉक्टर किसी दवा या इंजेक्शन के माध्यम से मरीज की मृत्यु सुनिश्चित करते हैं।

2. निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia)
इसमें मरीज को दी जा रही जीवनरक्षक चिकित्सा जैसे वेंटिलेटर या लाइफ सपोर्ट को हटाया जाता है, जिससे प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो सकती है।

भारत में सक्रिय इच्छामृत्यु अवैध है, लेकिन निष्क्रिय इच्छामृत्यु कुछ शर्तों के साथ अनुमति प्राप्त है।

भारत में इच्छामृत्यु को लेकर कानून

AIIMS Delhi Euthanasia Case News : भारत में इच्छामृत्यु को लेकर महत्वपूर्ण फैसला Supreme Court of India ने वर्ष 2018 में दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को कुछ शर्तों के साथ वैध माना था। इसके तहत अगर कोई मरीज असाध्य बीमारी से पीड़ित है और जीवनरक्षक उपकरणों के सहारे जीवित है, तो कुछ कानूनी प्रक्रियाओं के बाद लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी जा सकती है।

इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने “लिविंग विल” की अवधारणा को भी मान्यता दी थी।

क्या होती है लिविंग विल

AIIMS Delhi Euthanasia Case News : Living Will एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें व्यक्ति पहले से यह लिखकर दे सकता है कि अगर वह भविष्य में गंभीर बीमारी या कोमा जैसी स्थिति में पहुंच जाए, तो उसे किस प्रकार का इलाज दिया जाए या नहीं दिया जाए।

इस दस्तावेज के आधार पर डॉक्टर और परिवार भविष्य में चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं।

डॉक्टरों की भूमिका

AIIMS Delhi Euthanasia Case News : एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के मामलों में बेहद सावधानी और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाता है।

किसी भी मरीज के मामले में इच्छामृत्यु का फैसला तुरंत नहीं लिया जाता, बल्कि इसके लिए कई स्तरों पर जांच और समीक्षा की जाती है।

डॉक्टरों की एक टीम मरीज की स्थिति का विस्तृत अध्ययन करती है। इसके अलावा अस्पताल की एथिक्स कमेटी और कानूनी विशेषज्ञों से भी राय ली जाती है।

यदि सभी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं और कानून इसकी अनुमति देता है, तभी आगे की कार्रवाई की जाती है।

समाज में छिड़ी बहस

इस मामले के सामने आने के बाद समाज में इच्छामृत्यु को लेकर बहस तेज हो गई है।

कुछ लोग मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति असहनीय दर्द और लाइलाज बीमारी से जूझ रहा है, तो उसे सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार मिलना चाहिए।

वहीं कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों का कहना है कि जीवन देना और लेना केवल प्रकृति या ईश्वर के हाथ में होना चाहिए, इसलिए इच्छामृत्यु को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।

मरीज और परिवार की मानसिक स्थिति

AIIMS Delhi Euthanasia Case News : ऐसे मामलों में मरीज और उसके परिवार की मानसिक स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

लंबे समय तक गंभीर बीमारी और अस्पताल में रहने के कारण परिवार आर्थिक और भावनात्मक रूप से भी काफी दबाव में आ जाता है।

कई बार मरीज खुद भी लगातार दर्द और पीड़ा से परेशान होकर इलाज बंद करने की इच्छा जाहिर करता है।

इसी कारण कई देशों में इच्छामृत्यु को मानवीय आधार पर अनुमति दी गई है।

अन्य देशों में कानून

दुनिया के कई देशों में इच्छामृत्यु को अलग-अलग नियमों के तहत अनुमति दी गई है।

जैसे Netherlands, Belgium, Canada और Switzerland जैसे देशों में कुछ शर्तों के साथ इच्छामृत्यु की अनुमति है।

इन देशों में मरीज की इच्छा, डॉक्टरों की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही इस तरह का निर्णय लिया जाता है।

भविष्य में क्या हो सकता है

AIIMS Delhi Euthanasia Case News : दिल्ली के एम्स में सामने आया यह मामला आने वाले समय में देश में इच्छामृत्यु को लेकर नीति और कानून पर नई चर्चा शुरू कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चिकित्सा तकनीक विकसित हो रही है, वैसे-वैसे जीवन और मृत्यु से जुड़े नैतिक प्रश्न भी सामने आ रहे हैं।

ऐसे में सरकार और न्यायपालिका को मरीजों के अधिकार, चिकित्सा नैतिकता और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनानी होगी।