Trump War Room Meeting

Trump War Room Meeting

Trump War Room Meeting: ट्रंप का ‘वॉर रूम’ एक्शन, ईरान पर अंतिम प्रहार की तैयारी, टॉप अफसरों संग 45 मिनट की हाई लेवल मीटिंग

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर बड़ा सैन्य मंथन किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी United States Central Command (CENTCOM) के शीर्ष अधिकारियों के साथ करीब 45 मिनट तक ‘वॉर रूम’ ब्रीफिंग की। इस हाई लेवल मीटिंग में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई, ‘फाइनल ब्लो’ रणनीति और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, व्हाइट हाउस और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिडिल-ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर ट्रंप को विस्तृत जानकारी दी। बैठक में ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियों, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा और संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर कई अहम बिंदुओं पर विचार किया गया।

ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा, दिल्ली को निशाना बनाने वाली मिसाइल को IAF ने हरियाणा में किया ध्वस्त

बताया जा रहा है कि चर्चा के दौरान ‘अंतिम प्रहार’ यानी निर्णायक सैन्य कार्रवाई की रणनीति पर विशेष फोकस रहा। अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञों ने ट्रंप के सामने ऐसे विकल्प रखे, जिनके जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाया जा सके। इनमें समुद्री मार्गों की निगरानी बढ़ाना, युद्धपोतों की अतिरिक्त तैनाती और होर्मुज जलडमरूमध्य में सख्त नियंत्रण जैसे कदम शामिल बताए जा रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है। इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रणनीति अपनाने की तैयारी में है। हालांकि अब तक अमेरिका की ओर से किसी बड़े सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ‘वॉर रूम’ बैठक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है।

उधर, मिडिल-ईस्ट के कई देशों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल कीमतों और सुरक्षा हालात पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका की अगली रणनीति और ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।