Bandi Singh Release Protest
Bandi Singh Release Protest
दिल्ली में शुक्रवार को ‘बंदी सिंह’ रिहाई की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। पंजाब और हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे सिख संगठनों और किसानों ने संसद की ओर पैदल मार्च निकालने का प्रयास किया, जिसके दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन में हरियाणा के सिरसा से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण मार्च के बावजूद पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका और बलपूर्वक हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे वर्षों से जेलों में बंद ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई की मांग उठा रहे हैं और केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर ठोस फैसला लेना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हाथों में प्रतीकात्मक हथकड़ियां पहन रखी थीं और कई प्रदर्शनकारी काले कपड़ों में नजर आए। उनका कहना था कि यह प्रदर्शन उन सिख कैदियों की पीड़ा और लंबे इंतजार को दर्शाने के लिए किया गया है, जिन्हें सजा पूरी होने के बाद भी रिहा नहीं किया गया।
दिल्ली पुलिस ने संसद और संवेदनशील इलाकों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए अलग-अलग थानों में भेज दिया।
इस प्रदर्शन में सिरसा से पहुंचे किसान नेता लखविंद्र सिंह, अंग्रेजी सिंह कोटली और दलजीत सिंह रंगा भी शामिल रहे। नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘धक्काशाही’ बताया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सरकार आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस संवेदनशील मुद्दे को नजरअंदाज कर रही है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘बंदी सिंह’ का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और भावनात्मक आस्था से जुड़ा विषय है। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर ‘बंदी सिंहों को रिहा करो’ और ‘इंसाफ दो’ जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।
दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन के बाद पंजाब और हरियाणा की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। सिख संगठनों ने केंद्र सरकार से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि सुरक्षा कारणों और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को रोका गया।