Haryana Missing Children Report
Haryana Missing Children Report: महफूज नहीं बचपन: हरियाणा से एक साल में 3055 बच्चे लापता, पानीपत बना ‘मिसिंग चिल्ड्रन कैपिटल’
हरियाणा में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली और चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने राज्य में कानून-व्यवस्था और बाल सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘महफूज नहीं बचपन’ की कड़वी हकीकत को बयां करते हुए आंकड़ों से पता चला है कि पिछले महज एक साल के भीतर हरियाणा से 3055 बच्चे लापता हुए हैं। यह आंकड़ा यह साफ दर्शाता है कि राज्य में मासूमों पर मंडरा रहा खतरा किस कदर बढ़ चुका है। इस पूरी रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाले आंकड़े टेक्सटाइल सिटी के नाम से मशहूर पानीपत जिले से आए हैं, जो अब प्रदेश में बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित इलाका बनकर उभरा है।
पानीपत को अब हरियाणा का ‘मिसिंग चिल्ड्रन कैपिटल’ कहा जाने लगा है, क्योंकि यहां से सबसे ज्यादा बच्चे गायब हुए हैं। इसके ठीक उलट, जींद जिला पूरे प्रदेश में बच्चों के लिहाज से सबसे सुरक्षित माना गया है, जहां बच्चों के लापता होने की दर सबसे कम दर्ज की गई है।
ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा, दिल्ली को निशाना बनाने वाली मिसाइल को IAF ने हरियाणा में किया ध्वस्त
लापता बच्चों के इन डरावने आंकड़ों में औद्योगिक और शहरी हब माने जाने वाले जिले सबसे आगे नजर आ रहे हैं। साइबर सिटी गुरुग्राम और राजधानी दिल्ली से सटे सोनीपत जिले में भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। इन दोनों ही बड़े जिलों में पिछले एक साल के दौरान बच्चों के गायब होने के 300 से भी ज्यादा मामले पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र रह चुका करनाल जिला भी इस मामले में पीछे नहीं है; यहां एक साल के भीतर 286 बच्चे लापता हुए हैं, जो प्रशासन की चौकसी पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
इन बड़े और घनी आबादी वाले शहरों में लगातार बढ़ते औद्योगिकरण, प्रवासियों की भारी संख्या और सुरक्षा चक्र में ढील को इन मामलों के पीछे की मुख्य वजह माना जा रहा है। मानव तस्करी, बाल मजदूरी और फिरौती जैसे अपराधों के चलते इन जिलों के बच्चे लगातार शिकार बन रहे हैं।
दूसरी तरफ, राज्य के कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां की स्थिति काफी हद तक संतोषजनक और राहत देने वाली रही है। चरखी दादरी, नूंह और झज्जर जैसे जिलों में बच्चों के लापता होने के बेहद कम मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में सामाजिक ताना-बाना और पुलिस की मुस्तैदी को इस सुरक्षा का आधार माना जा सकता है। इस पूरी सूची में जींद जिला एक मिसाल बनकर उभरा है, जहां पूरे हरियाणा में सबसे कम मामले दर्ज हुए हैं और इसे बच्चों के लिए सबसे महफूज कोना घोषित किया गया है।
बहरहाल, 3055 बच्चों का आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों का दर्द है जिनकी गोद सूनी हो चुकी है। पानीपत, गुरुग्राम और सोनीपत जैसे जिलों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और लोकल पुलिस को और अधिक सक्रिय होने की जरूरत है, ताकि गुमशुदा बच्चों की जल्द से जल्द सुरक्षित बरामदगी हो सके और बचपन को दोबारा सुरक्षित किया जा सके।
