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Digital Arrest Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 2.13 करोड़ की ठगी, रिटायर CAG अफसर से धोखा करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

Digital Arrest Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 2.13 करोड़ की ठगी, रिटायर CAG अफसर से धोखा करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

देश में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से सेवानिवृत्त एक वरिष्ठ अधिकारी को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर 2.13 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। इस मामले में हरियाणा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुणे से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ में दर्ज शिकायत के आधार पर की गई।

ऐसे रची गई ठगी की साजिश

जानकारी के अनुसार, ठगों ने खुद को जांच एजेंसी और बैंक अधिकारियों के रूप में पेश किया। उन्होंने रिटायर अधिकारी को फोन कर बताया कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है। आरोपियों ने उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी और कहा कि यदि वे सहयोग नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

घबराए अधिकारी को वीडियो कॉल के जरिए कई घंटों तक ऑनलाइन रखा गया। इस दौरान उनसे बैंक खातों की जानकारी ली गई और अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई। कुल मिलाकर 2.13 करोड़ रुपये आरोपियों ने हड़प लिए।

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पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ ने तकनीकी जांच शुरू की। बैंक लेन-देन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण के बाद पुलिस को गिरोह की लोकेशन पुणे में मिली। स्थानीय पुलिस के सहयोग से छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने 256 सिम कार्ड, कॉल कनवर्टर, कॉलिंग डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी कॉल सेंटर के जरिए देशभर में लोगों को निशाना बनाते थे।

1.25 करोड़ रुपये फ्रीज

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की गई रकम में से 1.25 करोड़ रुपये फ्रीज करवा दिए हैं। शेष राशि की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में और खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की आशंका है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या है?

हाल के समय में “डिजिटल अरेस्ट” शब्द का इस्तेमाल कर ठग लोगों को डराते हैं। वे खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर व्यक्ति को घंटों ‘नजरबंद’ रखते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। असल में ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसमें किसी को वीडियो कॉल पर गिरफ्तार किया जा सके।

पुलिस की अपील

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल या वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराए या पैसे मांगे, तो तुरंत नजदीकी साइबर थाने या हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। सतर्कता और जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।