Madhya Pradesh Dail 112: डायल-112 विवाद: एमपी पुलिस हाई कोर्ट की पकड़ में — किसने किया केस?
जबलपुर, मध्य प्रदेश: Madhya Pradesh Dail 112 मध्य प्रदेश में आपातकालीन सेवा डायल-112 (Dial-112) से जुड़ा विवाद अब न्यायालय की दहलीज़ तक पहुंच गया है और पुलिस विभाग तथा सरकार को सुप्रीम कोर्ट से उत्तर देने को कहा गया है। यह मामला सिर्फ तकनीकी गड़बड़ियों का नहीं है, बल्कि 972 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट की पारदर्शिता, टेंडर प्रक्रिया और अनुबंध शर्तों के उल्लंघन से जुड़ा है।
डायल-112 सेवा प्रदेश में आपात स्थितियों में पुलिस, एंबुलेंस और अग्निशमन जैसी सेवाओं को समन्वयित रूप से उपलब्ध कराने की योजना है। पिछली सरकार ने फेज-2 के तहत इस सेवा के विस्तार के लिए लगभग 972 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट मंजूर किया था, जिसमें 1200 वाहन, तकनीकी ढांचा, डेटा सेंटर और कॉल हैंडलिंग सिस्टम शामिल थे।
बुनियादी विवाद की जड़ — टेंडर और सॉफ्टवेयर का मुद्दा
Madhya Pradesh Dail 112: मुख्य विवाद वहां से शुरू हुआ जब मूल कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद एक नया टेक्नोलॉजी कॉन्ट्रैक्ट (CAD Software) के लिए टेंडर जारी किया गया। मूल प्रोजेक्ट का ठेका EMRI Green Health Services नामक कंपनी को दिया गया था, जो मार्च 2025 में सिस्टम इंटीग्रेटर के रूप में नियुक्त हुई थी और सितंबर 2025 से सेवाएं प्रदान कर रही थी।
कंपनी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को उसी काम के लिए अलग से नया टेंडर निकाला गया, जो मूल अनुबंध को ही कवर करता था। कंपनी का दावा है कि पुलिस विभाग ने बिना मूल अनुबंध रद्द किए दूसरे टेंडर जारी कर अनुबंध शर्तों का उल्लंघन किया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ और यह अनुचित प्रक्रिया है।
इसी वजह से EMRI Green Health Services ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसमें सरकार और पुलिस विभाग द्वारा जारी नए टेंडर को चुनौती दी गई और मूल अनुबंध को लागू रखने की मांग की गई।
हाई कोर्ट का रुख और सवाल
जब यह मामला जबलपुर हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष आया, तो अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस से विस्तृत जवाब तलब कर लिया। अदालत ने न सिर्फ प्रोजेक्ट की लागत पर टिप्पणी की, बल्कि यह भी पूछा कि 972 करोड़ की लागत में क्या गाड़ियाँ इतनी महंगी हैं — ‘क्या डायल-112 में मर्सिडीज़ चला रहे हैं?’ जैसी तीखी टिप्पणी भी दर्ज की।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मूल टेंडर रद्द नहीं होता, नया टेंडर लागू नहीं किया जा सकता। साथ ही पुलिस से CAD सॉफ्टवेयर की तकनीकी स्थिति, मौजूदा प्रणाली की कार्यक्षमता और उसकी सीमाओं पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
दोनों पक्षों के दावे
EMRI Green Health Services का पक्ष
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कंपनी ने कोर्ट में बताया कि वे 15 दिनों में 1 लाख से अधिक कॉल सफलतापूर्वक हैंडल कर चुके हैं।
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उनका तर्क है कि सॉफ्टवेयर पर सिर्फ कुछ मामूली गड़बड़ियाँ थीं, परंतु नए टेंडर जारी करना अनुचित है।
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कंपनी का आरोप है कि पुलिस ने उनके डेटा सेंटर और सर्वरों पर जबरन कब्जा करने की कोशिश भी की, जो उन्होंने आपराधिक व्यवहार जैसा बताया।
पुलिस विभाग का पक्ष
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पुलिस ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि मौजूदा CAD सॉफ्टवेयर में तकनीकी कमजोरियाँ हैं, जैसे कि कॉल आने पर आसपास की उपयुक्त फ़र्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल (FRV) के बजाय दूर की गाड़ी को अलर्ट जाना।
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उन्होंने नए टेंडर जारी करने के लिए यह आधार प्रस्तुत किया कि मौजूदा प्रणाली की प्रदर्शन क्षमता संतोषजनक नहीं थी।
हाई कोर्ट का निर्देश और अगली सुनवाई
Madhya Pradesh Dail 112: हाई कोर्ट ने सरकार को 21 फरवरी तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस जवाब की प्रति याचिकाकर्ता कंपनी को भी दी जाएगी ताकि वे अपना प्रतिवाद तैयार कर सकें। अदालत ने नई टेंडर प्रक्रिया पर अंतरिम रोक भी लगा दी है, जब तक कि विस्तृत जवाब और तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं हो जाती।
प्रभाव और समाजिक चिंता
Madhya Pradesh Dail 112: यह मामला अब सिर्फ ठेका विवाद नहीं रह गया है बल्कि सरकारी धन का उपयोग, निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावशीलता जैसी सवालों का केंद्र बन चुका है। जनता के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि आपात सेवाओं की गुणवत्ता सीधे लोगों की सुरक्षा और जीवन रक्षा से जुड़ी है। जिन सेवाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, उन पर अस्पष्टता और तकनीकी विचार विमर्श से जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
