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वैश्विक टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले Pax Silica गठबंधन में शामिल होकर रणनीतिक कदम उठाया है। इस साझेदारी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में गेमचेंजर माना जा रहा है।
यह गठबंधन मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने, एडवांस चिप निर्माण बढ़ाने और AI टेक्नोलॉजी में सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस पहल में United States की अहम भूमिका बताई जा रही है, जो लंबे समय से वैश्विक टेक नेतृत्व बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की एंट्री से वैश्विक चिप बाजार में शक्ति संतुलन बदल सकता है। इससे न सिर्फ हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ेगा, बल्कि नई सप्लाई चेन भी विकसित होंगी। कई विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम एशिया में तकनीकी प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के संदर्भ में।
टेक सेक्टर के जानकारों के अनुसार, इस साझेदारी से भारत को एडवांस सेमीकंडक्टर उत्पादन, रिसर्च सहयोग और हाई-एंड टेक्नोलॉजी एक्सेस में बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही, वैश्विक AI विकास और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी नई गति आने की संभावना है।
कुल मिलाकर, Pax Silica में भारत की भागीदारी को सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर वैश्विक टेक बाजार, निवेश और शक्ति संतुलन — तीनों पर साफ दिखाई दे सकता है।