Russia India Oil Trade
Russia India Oil Trade: रूस-भारत तेल व्यापार, चीन का रास्ता छोड़ मंगलुरु पहुँचा एक्वा टाइटन, भारत ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद
भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग एक नए मोड़ पर पहुँच गया है, जिसका ताजा उदाहरण तेल टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ का चीन के बजाय भारत की ओर रुख करना है। मूल रूप से चीन के लिए रवाना हुआ यह विशाल टैंकर रूसी कच्चे तेल को लेकर कर्नाटक के मंगलुरु पोर्ट पर सफलतापूर्वक लंगर डाल चुका है। यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की बढ़ती स्थिति और रूस के साथ उसके सुदृढ़ व्यापारिक संबंधों को रेखांकित करता है।
हाल के समय में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और लाल सागर में अस्थिरता के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने की रणनीति को और तेज कर दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, चीन की ओर जा रहे कुल सात तेल टैंकरों के बेड़े में से ‘एक्वा टाइटन’ पहला है जिसने अपना मार्ग बदलकर भारतीय तट का चयन किया है। यह बदलाव केवल लॉजिस्टिक्स का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत द्वारा पेश की जा रही बेहतर खरीद शर्तों और तत्काल भुगतान प्रणालियों का भी परिणाम माना जा रहा है।
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मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इन रूसी खेपों को प्राप्त करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जो पारंपरिक खाड़ी देशों को पीछे छोड़ चुका है। भारत की यह रणनीति न केवल घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करती है, बल्कि पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद स्वतंत्र विदेश नीति और आर्थिक हितों के संतुलन को भी दर्शाती है।
चीन के रास्ते से हटकर भारत आना इस बात का संकेत है कि रूसी निर्यातकों के लिए भारतीय बाजार अब अधिक विश्वसनीय और आकर्षक गंतव्य बन गया है। आने वाले दिनों में शेष छह टैंकरों के भी भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने की संभावना है, जो देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को और मजबूती प्रदान करेंगे।
