Supreme Court Instructions: सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर विवाद में केंद्र से सहयोग को कहा पंजाब-हरियाणा को।
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Supreme Court Instructions: सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर विवाद में केंद्र से सहयोग को कहा पंजाब-हरियाणा को।

Supreme Court Instructions: सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल नहर विवाद में पंजाब और हरियाणा को केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि समाधान नहीं होने पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पर सुनवाई करते (Supreme Court Instructions) हुए पंजाब और हरियाणा को निर्देश दिया है कि वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर मामले का समाधान निकालें। अदालत ने कहा कि समाधान नहीं होने पर 13 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।

Supreme Court Instructions
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हरियाणा: सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब और हरियाणा सरकारों को केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यदि 13 अगस्त 2025 तक कोई समाधान नहीं निकलता है, तो अदालत उस दिन मामले की अगली सुनवाई करेगी।

विवाद 1996 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित

Supreme Court Instructions: यह विवाद 1996 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जब हरियाणा ने पंजाब के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। 2002 में अदालत ने पंजाब को एक वर्ष के भीतर नहर का निर्माण पूरा करने का आदेश दिया था, जिसे 2004 में दोहराया गया। हालांकि, पंजाब सरकार ने नहर निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि को ‘डिनोटिफाई’ कर दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ‘हाई-हैंडेडनेस’ करार दिया।

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92 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण

Supreme Court Instructions: हरियाणा ने अपने हिस्से की 92 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण पूरा कर लिया है, जबकि पंजाब में 122 किलोमीटर की नहर अधूरी है। पंजाब का कहना है कि उसके पास हरियाणा को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है, जबकि हरियाणा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन की मांग कर रहा है।

अदालत करेगी आगे की कार्रवाई 

Supreme Court Instructions: केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता के प्रयास किए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि दोनों राज्य सहयोग नहीं करते हैं, तो अदालत आगे की कार्रवाई करेगी। यदि आप इस विवाद के ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं, तो मैं और विवरण प्रदान कर सकता हूँ।